मैं और मीनाक्षी मैडम

प्रेषक : यश

मेरा नाम यश है और मेरी उम्र 19 वर्ष की है। मेरे घर में मेरे माता-पिता और मैं और मेरा एक भाई है।

बात उन दिनों की जब मैं 12वीं क्लास में पढ़ा करता था। मैं अंग्रेजी में थोड़ा कमजोर था, इसलिए मेरे पिताजी ने अपने एक दोस्त की बेटी मीनाक्षी के पास ट्यूशन के लिए भेजना शुरू कर दिया।

वो एक स्कूल में टीचर थी। मैं हर रोज शाम को 5 बजे उसके पास जाता था। उसके पास और भी विद्यार्थी आते थे, लेकिन वो मेरे से छोटी क्लास वाले होते थे।

एक मैं ही उन सभी में बड़ा था। मीनाक्षी का रंग गोरा था और वह देखने में बहुत सैक्सी थी।

उसके बड़े बड़े संतरे थे और उसकी पिछाड़ी तो बाहर की तरफ उभरी हुई थी। वो बहुत ही गोरी थी। कोई भी उसे एक बार देख ले तो वह देखता ही रह जाए।

मैं हर रोज अंग्रेजी पढ़ने के लिए उसके पास जाता था। मैं पढ़ता कम था उसको देखता ज्यादा रहता था। मैं हर समय उसके चूतड़ों की तरफ देखता रहता था। कभी-कभी वह इतने पतले कपड़े पहन लेती थी कि उसकी पैन्टी भी साफ दिखाई पड़ती थी। उस दिन तो मैं घर में जाकर मुठ जरूर मारता था। मैं सपनों में हर रोज उससे सम्भोग करता था।

जब वह पढ़ाती थी तो इतनी सैक्सी लगती थी कि उसे पकड़ कर वहीं चोद दूँ, लेकिन वो मुझसे बातें कम करती थी और पढ़ाती ज्यादा थी।

बात उस दिन की है कि जब मैं दो दिन ट्यूशन नहीं गया था। मुझे अपने एक दोस्त की बहन की शादी में जाना था। मैं ट्यूशन पर बताना भूल गया कि मैं दो दिन नहीं आऊँगा।

मैं दो दिन ट्यूशन पर नहीं गया, लेकिन जब दो दिनों के बाद मैं हर रोज की तरह 5 बजे ट्यूशन के लिए घर से निकला जब मैं पहूँचा तो वहाँ कोई नहीं था।

शायद उस दिन छुट्टी थी। लेकिन मैं तो दो दिनों के बाद ट्यूशन पर आया था। मुझे छुट्टी के बारे पता नहीं था। मैंने सोचा चलो पूछ लेता हूँ।

मैंने मीनाक्षी को ‘मैडम जी’ कह कर आवाजें दीं, लेकिन कोई नहीं आया। मैंने दरवाजा भी खड़काया लेकिन तब भी कोई नहीं आया, तो मैं घर का दरवाजा खोलकर सीधा अंदर चला गया।

अंदर गया तो मीनाक्षी अकेली अपने कमरे में पड़ी थी और शायद सो रही थी, इसलिये मेरी आवाज नहीं सुनी।

घर पर और कोई नहीं था। लग रहा था कि सब कहीं बाहर गये हुऐ थे।

मैं तो इसी मौके की तलाश में था। मैं पहले तो ऐसे ही मीनाक्षी को देखता रहा। वो सोते हुऐ इतनी ज्यादा सुन्दर लग रही थी कि मन कर रहा था कि अभी उसके साथ जाकर चिपक जाऊँ। मैं हल्के-हल्के कदमों के साथ आगे बढ़ा और उसके काफी करीब आ गया।

मैंने धीरे से उसके ऊपर से चादर उठा दी जिसे उसने ओढ़ा हुई थी। उसने सलवार कमीज पहना हुई थी। सलवार पूरी तरह से उसके चूतड़ों में फंसी हुई थी और उसकी लाल रंग की पैन्टी पारदर्शी सलवार में से दिख रही थी।

मैं तो पूरी तरह से पागल सा हो गया था। मेरा लौड़ा खड़ा हो गया था। दिल कर रहा था की बस अभी बस कुछ कर दूँ। मैंने अपना हाथ आगे बढ़ाया और उसकी टाँगों पर रख दिया और धीरे-धीरे आगे बढ़ाने लगा और उसकी जाँघों तक पहुच गया।

उसके बाद मेरी हिम्मत और बढ़ी और मैंने हल्के-हल्के हाथों से उसकी पैन्टी के ऊपर से ही चूत पर फेरने लगा। कभी थोड़ा अंदर की तरफ करता, कभी बाहर।

लेकिन वो गहरी नींद में सो रही थी। मैं उसकी चूत पर हाथ रखा हुआ था कि तभी वह दूसरी तरफ घूम गई और मेरा हाथ उसकी दो टाँगों के बीच में ही फँस गया।

मै डर गया कि कहीं वह उठ ना जाए। मैंने धीरे से अपना हाथ उसकी टाँगों से निकालने की कोशिश की, तभी उसकी आँख खुल गई और मैं घबरा गया।

वो मुझे देख कर गुस्से से चिल्लाने लगी- तुम यह क्या कर रहे थे मेरे साथ? मैं तुम्हारे पापा को बता दूँगी।

मैंने उससे क्षमा माँगते हुए, उससे अपने मन की सारी बात बता दी कि मैं तुम्हें पहले दिन से देख रहा हूँ। तुम बहुत सुंदर हो और मैं तुम्हें बहुत पसंद करता हूँ।

अचानक तभी उसने मेरा खड़ा लौड़ा देख लिया, जिसे मैं छुपाने की कोशिश कर रहा था।

शायद उसको मेरा लौड़ा पसंद आ गया था। उसने अपने मुँह पर हाथ रखते हुए कहा- यह क्या है यश? मैंने आव देखा ना ताव, अपनी पैंट खोल कर अपना लण्ड निकाल कर उसे दिखाया। वो उसे छूकर देखने लगी, उससे खेलने सी लगी।

मैंने कहा- चलो कुछ करते हैं, किसी को कुछ पता नहीं चलेगा, सिर्फ थोड़ी देर की तो बात है।

पहले तो वो इन्कार करती रही पर बाद में उसने थोड़ा सहयोग करना शुरु किया तो मैंने उसी समय उसकी सलवार खींच दी और सलवार नीचे टाँगों तक आ गई।

वो सीत्कारियाँ भरती रही, लेकिन मैं उसकी गोरी-गोरी टाँगों पर अपना हाथ फेरता रहा और उसके बाद उसकी पैन्टी भी उतार दी। उसकी चूत बिल्कुल चिकनी थी। और थोड़ी गीली भी थी।

उसका बदन मेरा साथ दे रहा था, दिखावे के लिये वह दबी जुबान में बोलती रही कि ऐसा मत करो, ऐसा मत करो, लेकिन मैं कहाँ हटने वाला था।

मैं उसकी गोरी चूत को देख पागल हो गया और मैंने बिना कुछ सुने, अपना मुँह उसकी चूत पर रख दिया और पागलों की तरह चूसता रहा।

उसके मुँह से सीत्कारें आ रही थीं, “आआ आ आ मत करो आ हा आहा मत करो प्लीज़।”

मेरा लौड़ा लोहे की तरह अकड़ गया था। मैंने अपना लौड़ा उसकी चूत में घुसेड़ दिया और जोर-जोर के झटके मारने लगा।

मैंने एक ऊँगली उसकी गांड में डाल दी और जोर से आगे-पीछे कर रहा था। अभी पाँच मिनट ही हुए थे कि मैंने देखा कि उसकी चूत में से पानी बहने लगा।

मैं अभी भी उसे चोद रहा था फिर मैं उसके होंठ चूसने लगा। मैं उसको कुछ बोलने का मौका नहीं दे रहा था।

मैं झड़ गया और मेरा सारा माल उसकी चूत में निकल गया। मैंने जैसे ही अपना लौड़ा उसकी चूत से निकाला तो उसकी चूत में से ढेर सारा पानी निकल रहा था और उसकी चूत पानी-पानी हो गई।

उसकी टाँगें भीग कर चिपक सी गई थीं। मैं कुछ देर ऐसे ही पड़ा रहा और वह भी ऐसे ही निढाल पड़ी रही।

बाद में उसने मुझे बताया कि उसे बहुत मज़ा आया !